हम मझवार हैं ,कमजोर नहीं।हम नदी के बेटे हैं हमारी पहचान जल से है, मेहनत से है, और अपने आत्मसम्मान से है। इतिहास गवाह है कि जब-जब अन्याय हुआ है, निषाद राज जैसे महापुरुषों ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए आवाज उठाई है।
हम मझवार समाज सदियों से अपनी मेहनत, सादगी और ईमानदारी से जीवन जीते आ रहे हैं। हम मछलियों के पीछे नाव लेकर निकलते हैं, लेकिन हमारे हौसले समंदर से भी गहरे हैं। हम चुप रह सकते हैं क्योंकि हमारी संस्कृति विनम्र है, पर यह मत भूलिए कि हमारी चुप्पी हमारी कमजोरी नहीं है। हमारी चुप्पी शांति की प्रतीक है, लेकिन जब अन्याय बढ़ता है तो यही चुप्पी गरज बन जाती है। हम न किसी से पीछे हैं, न किसी से कम। हम अपने हक़ की बात करना अब जानते हैं, और समय आने पर उसे लेकर भी रहते हैं।
जय निषाद राज यह सिर्फ एक नारा नहीं, यह हमारी अस्मिता की गूंज है। आज हम सौभाग्यशाली हैं कि निषाद समाज को एक दिशा देने का कार्य निषाद पार्टी के माध्यम से किया जा रहा है। इस आंदोलन के सुप्रीमो आदरणीय डॉक्टर संजय कुमार निषाद जी ने समाज को न केवल जागरूक किया है, बल्कि सत्ता की चाबी बनाकर दिखा दिया कि हम संगठित हों तो कोई ताकत हमें रोक नहीं सकती। डॉ. संजय कुमार निषाद जी का और निषाद पार्टी के समस्त कार्यकर्ताओं के संघर्ष, दूरदृष्टि और नेतृत्व आज लाखों निषाद साथियों के लिए प्रेरणा बन चुका है। महामना डॉ संजय निषाद जी का संदेश स्पष्ट है की अब अधिकार भी चाहिए और सम्मान भी। आइए इस चेतना को हर गली, हर गांव, हर प्रदेश तक पहुचाये….!!!
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