यादव समाज जब तक ज्ञान और संविधान में पिछड़ा था तब तक सरकारे इन्हे उल्लू बनाती रहीं। यादव समाज अज्ञानता वश कभी कांग्रेस, कभी भाजपा को अपना बहुमूल्य वोट देता था तो गरीब और गवार था। लेकिन जब से माननीय मुलायम सिंह यादव जी का ज्ञान लिया जय समाजवाद बोला, संविधान को जाना और समाजवादी बन गया तो आप देख सकते है की 4 बार समाजवादी पार्टी सत्ता में रहीं।
उसी तरह आप दलित भाई को देख सकते है जब तक वह दलित था तो ज्ञान, संविधान, पैसा, पावर, मनी और नौकरी में भी पीछे था। वो भी अपना बहुमूल्य और कीमती वोट कोंग्रेस को देता था। लेकिन जब जन वह मान्यवर कांसीराम साहब की बातों को माना और बहुजन बन कर पुरे समाज को इकठ्ठा किया और प्रदेश में 4 बार बहन जी को मुख्यमंत्री बनाकर अपने हाथ में सत्ता ली।
कहने का तात्पर्य यह है की हम समाजवादी में पिछड़ा भी बने, बहुजन में बहुजन और भाईचारा कमेटी भी बने लेकिन हमारा भला नहीं हुआ। लेकिन जब से हम “निषादवादी” बने और जय “निषाद राज” बोलने लगे तो इनके मान सम्मान में वृद्धि हुई। ऐतिहासिक विरासत को विश्व पटल पर लाने का कार्य किया सड़क से सदन तक निषादों की आवाज़ को बुलंद करने का कार्य किया गया। महामना जी के नेतृत्व में पूरा समाज एक सूत्र में बधकर अपनी आवाज़ उठा रहा है। जो समाज कभी अपने ऊपर हो रहें अन्याय के खिलाफ कभी बोल नहीं पाता था वो आज अपनी हर समस्या और उसके अंदर सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक चेतना आयी है जिससे हमारा समाज शशक्त बन रहा है और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हुआ है और वो भी अपने संवैधानिक अधिकार के लिए लड़ाई लड़ रहा है।
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